UAPA की संवैधानिकता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता
गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [Unlwaful Activities (Prevention) Act - UAPA], 1967 भारत में गैर-कानूनी गतिविधियों वाले संगठनों की कारगर रोकथाम के लिए बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ निर्देशित गतिविधियों से निपटने के लिए कानूनी शक्ती का प्रयोग करना है।
- इस अधिनियम के अनुसार यदि कोई राष्ट्र विरोधी आन्दोलन का समर्थन करता है अथवा किसी विदेशी शक्ती द्वारा भारत के क्षेत्र पर किये गये दावे का समर्थन करता है तो वह अपराध माना जाएगा।
- यह कानून कुछ संवैधानिक अधिकारों पर ‘उचित’ प्रतिबंध लगाता है, जैसे कि- भाषण और अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक और हथियारों के ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का खतरा
- 2 उपग्रह युद्ध एवं GPS स्पूफिंग: नौवहन और रक्षा के लिए जोखिम
- 3 अंतरिक्ष शासन एवं वैश्विक मानदंड: संधि-विहीन क्षेत्र में भारत की भूमिका
- 4 उभरते सुरक्षा खतरे एवं कानूनी अंतराल: अद्यतन ढाँचों की आवश्यकता
- 5 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति: एकीकृत एवं समन्वित सुरक्षा संरचना की अनिवार्यता
- 6 सुरक्षा ढांचे के रूप में IT मध्यवर्ती नियम: डिजिटल प्लेटफॉर्म का विनियमन
- 7 एन्क्रिप्टेड संचार एवं सुरक्षा
- 8 सोशल मीडिया एवं भ्रामक जानकारी
- 9 वन्यजीव एवं संसाधनों की तस्करी
- 10 मानव तस्करी के माध्यम से आतंकवादी नेटवर्क का विस्तार

