वन्यजीव एवं संसाधनों की तस्करी
वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों की तस्करी एक “गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे” के रूप में उभरी है। भारत के जैव विविधता हॉटस्पॉट और खुली सीमाएं इसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के प्रति संवेदनशील बनाती हैं।
गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों की प्रकृति
- उच्च-मूल्य अवैध बाजार: बाघ के अंगों, गैंडे के सींग, पैंगोलिन के शल्क (scales) और लाल चंदन जैसे उत्पादों की तस्करी, वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए की जाती है।
- अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध: ये नेटवर्क दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले होते हैं और स्थापित तस्करी मार्गों का उपयोग करते हैं।
- अन्य अवैध गतिविधियों से संबंध: यह गतिविधियाँ मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और ....
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