डेटा उपनिवेशवाद: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती

वर्तमान युग में डेटा एक “रणनीतिक संसाधन” बनकर उभरा है। वैश्विक तकनीकी दिग्गज कम्पनियों के हाथों में डेटा का केंद्रीकरण “डेटा उपनिवेशवाद” (Data Colonization) की चिंताओं को जन्म देता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जहाँ बाहरी संस्थाएँ किसी राष्ट्र के डेटा को नियंत्रित और संसाधित करती हैं और उससे मुनाफा कमाती हैं, जो अंततः उस राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा को प्रभावित करता है।

वैश्विक टेक प्लेटफॉर्मों का नियंत्रण

  • दिग्गज कंपनियों का दबदबा: गूगल, मेटा, “X” (ट्विटर) और अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म भारतीय उपयोगकर्ताओं के विशाल डेटा को नियंत्रित करते हैं।
  • डेटा स्वामित्व में असमानता: भारतीय उपयोगकर्ता डेटा तो उत्पन्न करते ....

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