डिजिटल कट्टरपंथीकरण एवं युवा

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने कट्टरपंथीकरण (Radicalization) के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे चरमपंथी समूह अब दूर से ही युवाओं को निशाना बनाकर भर्ती कर सकते हैं। सोशल मीडिया तंत्र और वैचारिक भावना के इस सम्मिलन ने भारत के लिए एक गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती उत्पन्न कर दी है।

सोशल मीडिया की भूमिका

  • एल्गोरिद्म-आधारित एक्सपोज़र: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म अपने अनुशंसा तंत्र के माध्यम से ध्रुवीकरण और उग्रवादी सामग्री को बढ़ावा देते हैं, जिससे कट्टरपंथीकरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
  • ऑनलाइन प्रचार नेटवर्क: आतंकी संगठन एन्क्रिप्टेड ऐप्स और ऑनलाइन मंचों का उपयोग कर विचारधारात्मक सामग्री, वीडियो और साहित्य का प्रसार ....

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