जनजातीय विकास एवं सुरक्षा
भारत के जनजातीय क्षेत्र अक्सर वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित क्षेत्रों के साथ ओवरलैप करते हैं, जहाँ अविकास, विस्थापन और प्रशासनिक कमियों ने अलगाव और उग्रवाद को बढ़ावा दिया है। इन क्षेत्रों को स्थिर करने के लिए विकास-आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।
विस्थापन एवं अलगाव के कारण
- भूमि एवं संसाधन विवाद: खनन, बांध और अवसंरचना परियोजनाओं के कारण पर्याप्त पुनर्वास के बिना विस्थापन हुआ है, जिससे राज्य के प्रति अविश्वास बढ़ा है। वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कमजोर क्रियान्वयन ने असंतोष को और बढ़ाया है।
- आजीविका और पहचान का ह्रास: वन-आधारित अर्थव्यवस्था के बाधित होने से पारंपरिक आजीविका प्रभावित होती ....
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