“पड़ोसी प्रथम” नीति एवं सुरक्षा: साझा भविष्य, साझा सुरक्षा
भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति इस सिद्धांत को चरितार्थ करती है कि “सुरक्षित सीमाओं के लिए सुरक्षित पड़ोसियों का होना अनिवार्य है।” यह नीति दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए कूटनीति, विकास और रक्षा सहयोग को एक सूत्र में पिरोती है।
भू-राजनीतिक प्रासंगिकता
- संकट में स्थिरता की भूमिका: 2022 में श्रीलंका को दी गई $4 बिलियन की भारतीय सहायता ने उसे आर्थिक पतन से बचाया। इससे वहां की अस्थिरता का असर भारत तक नहीं पहुंच सका।
- संकट के समय नेपाल और मालदीव को दिया गया भारत का समर्थन वहां राजनीतिक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का खतरा
- 2 उपग्रह युद्ध एवं GPS स्पूफिंग: नौवहन और रक्षा के लिए जोखिम
- 3 अंतरिक्ष शासन एवं वैश्विक मानदंड: संधि-विहीन क्षेत्र में भारत की भूमिका
- 4 उभरते सुरक्षा खतरे एवं कानूनी अंतराल: अद्यतन ढाँचों की आवश्यकता
- 5 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति: एकीकृत एवं समन्वित सुरक्षा संरचना की अनिवार्यता
- 6 सुरक्षा ढांचे के रूप में IT मध्यवर्ती नियम: डिजिटल प्लेटफॉर्म का विनियमन
- 7 एन्क्रिप्टेड संचार एवं सुरक्षा
- 8 सोशल मीडिया एवं भ्रामक जानकारी
- 9 वन्यजीव एवं संसाधनों की तस्करी
- 10 मानव तस्करी के माध्यम से आतंकवादी नेटवर्क का विस्तार

