उग्रवाद-पश्चात् सुरक्षा शून्यता
भारत में वामपंथी उग्रवाद अब निर्णायक रूप से क्षीण होता दिखाई दे रहा है और सरकार ने वर्ष 2026 तक इसके पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस परिप्रेक्ष्य में “उग्रवाद-पश्चात् सुरक्षा शून्यता” की चुनौती उभरती है, जहाँ सुरक्षा बलों की वापसी के बाद कमजोर प्रशासनिक उपस्थिति, संस्थागत रिक्तता और विकास की कमी पुनः अस्थिरता को जन्म दे सकती है।
सुरक्षा शून्यता की प्रकृति
- केंद्रीय बलों की वापसी/कमी: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की उपस्थिति में कमी, यदि राज्य की क्षमता पर्याप्त न हो, तो क्षेत्रीय नियंत्रण में अंतराल पैदा कर सकती है।
- शेष नेटवर्क एवं विभाजित गुट: बचे हुए ....
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