ओजोन क्षरण वैज्ञानिक आकलन रिपोर्ट-2018

नवंबर, 2018 को संयुक्त राष्ट्र आधारित रिपोर्ट ‘ओजोन क्षरण वैज्ञानिक आकलन-2018’ (Scientific Assessment of Ozone Depletion-2018) के अनुसार अंटार्कटिक ओजोन छिद्र में सुधार हो रहा है। यह रिपोर्ट इक्वेडोर की राजधानी क्विटो में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकारों की 30वीं बैठक में जारी की गई।

उद्देश्य

यह रिपोर्ट हर चार वर्ष में ओजोन क्षरण करने वाले पदार्थों (Ozone Depletion Substances) के उपयोग को समाप्त करने वाले मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए जारी की जाती है।

ओजोन परत में 1980 के दशक के शुरुआती वर्षों में कमी पाई गई तथा 1984 में वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका पर पहली बार मौसमी छिद्र देखा। इसके बाद सरकारों ने ओजोन परत में और गिरावट को रोकने के लिए कार्रवाई करना प्रारम्भ किया। पहले क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) और हैलोन जैसी गैसों का उपयोग आमतौर पर रेफ्रिजरेटर्स और एयरोसोल जैसे उत्पादों में किया जाता था जो पृथ्वी के समताप मंडल में ओजोन की कमी को तेज करते थे, इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानकों और राजनेताओं ने इनके उपयोग को कम करने के लिए 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर सहमति जताई।

प्रमुख बिन्दु

समताप मंडल के कुछ हिस्सों में ओजोन परत में वर्ष 2000 से 1.3 प्रतिशत की दशकीय दर से सुधार हुआ है और इसी दर से सुधार होने पर, उत्तरी गोलार्ध और मध्य-अक्षांश की ओजोन के 2030 के दशक तक, दक्षिणी गोलार्ध के 2050 के दशक और ध्रुवीय क्षेत्रों के 2060 तक पूरी तरह से ठीक होना निर्धारित है।

अधिकांश प्रतिबंधित गैसों को चरणबद्ध तरीके से हटा दिया गया है लेकिन प्रोटोकॉल के कम से कम एक उल्लंघन द्वारा 2012 से पूर्वी एशिया से CFC-11 के उत्पादन और उत्सर्जन में अप्रत्याशित वृद्धि पाई गई। किगाली संसोधन द्वारा हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के कारण 2100 में वैश्विक औसत तापन के 0.3 से 0.5 डिग्री सेल्सियस की आधार रेखा से 0.1 डिग्री तक कम होने का अनुमान है।

पहले से अज्ञात महत्वपूर्ण कार्बन टेट्राक्लोराइड उत्सर्जन के स्रोतों को प्रमाणित किया गया है। इन स्रोतों में क्लोरोमेथेन (Chloromethane) और परक्लोरोएथिलीन (Perchloroethylene) के उत्पादन द्वारा उप-उत्पाद उत्सर्जन शामिल हैं।