कॉर्पोरेट टैक्स में कमी

उच्च कॉर्पोरेट कर (टैक्स) भारतीय अर्थव्यवस्था की धीमी प्रगति के लिए जिम्मेदार था। भारत में उत्पादित वस्तुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम प्रतिस्पर्द्धी थी, जिसके वजह से कम निर्यात होता था और क्षमता निर्माण (Capacity Generation) के लिए कम प्रोत्साहन उपलब्ध थे। 20 सितंबर, 2019 को सरकार ने कराधान कानून (संशोधन) अध्यादेश 2019 को लागू किया, जो आयकर अधिनियम 1961 और वित्त (संख्या 2) अधिनियम 2019 में संशोधन करता है। इस संशोधन का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थायी विकास के रास्ते पर लाना है।

प्रमुख प्रावधान

आयकर अधिनियम में शामिल प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:

  • किसी भी छूट/प्रोत्साहन का लाभ नहीं उठाने पर, वित्तीय वर्ष 2019-20 से घरेलू कंपनियां 22% की दर से आयकर का भुगतान करती हैं। अधिभार और उपकर को शामिल करते हुए, इन कंपनियों के लिए प्रभावी कर की दर 25.17% होगी। साथ ही ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • 1 अक्टूबर, 2019 को या उसके बाद निगमित और विनिर्माण क्षेत्र में नए निवेश करने वाली घरेलू कंपनियों के पास वित्त वर्ष 2019-20 से 15% की दर से आयकर देने का विकल्प है। यह लाभ उन कंपनियों के लिए उपलब्ध है, जो किसी छूट/प्रोत्साहन का लाभ नहीं उठाती हैं और 31 मार्च, 2023 को या उससे पहले उत्पादन शुरू करती हैं। इन कंपनियों के लिए प्रभावी कर की दर 17.01% (अधिभार और उपकर सहित) होगी। साथ ही ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • जो कंपनियां छूट/प्रोत्साहन का लाभ उठा रही हैं, उनके लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर की दर मौजूदा 18.5% से घटाकर 15% कर दी गई है।

प्रभाव

यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा देकर 350 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने की राह पर अग्रसर करने की क्षमता है। इस कदम से होने वाले प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • यह भारतीय कर संरचना को दक्षिण-पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के कर संरचना के करीब लाता है, जो विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी हैं।
  • यह उद्यमियों को क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देता है।
  • यह भारतीय उद्यमों में अधिक एफडीआई लाएगा।
  • क्रेडिट रेटिंग में सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारत में उच्च निवेश का चक्र बनाता है।