नौ-परिवहन

भारतीय बन्दरगाह और नौ-परिवहन देश के व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की तटीय रेखा लगभग 7,517 किमी है, जिसका विश्व में सोलहवाँ स्थान है। भारत में मुख्य भूमि की तट रेखा 6,100 किमी और द्वीपों की तट रेखा 1,197 किमी है।

  • भारतीय शिपिंग क्षेत्र की भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि देश का 90% से अधिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्र द्वारा संचालित होता है। 2018-19 में पिछले वित्त वर्ष (2017-18) से शिपिंग ट्रैफिक में 2.90 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • सितंबर 2019 तक गैर-प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो यातायात 348.44 मिलियन टन होने का अनुमान था। केंद्रीय बजट 2019-20 के अनुसार, नवंबर 2018 से गंगा की नौवहन क्षमता बढ़ाने के लिए जल मार्ग विकास परियोजना एक बहु मॉडल टर्मिनल वाराणसी में क्रियाशील है।
  • भारत सरकार ने बंदरगाहों के निर्माण और रख-रखाव से संबंधित परियोजनाओं के लिए स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी है। वर्तमान में भारत के 13 प्रमुख बंदरगाह और लगभग 200 छोटे बंदरगाह हैं। सागरमाला योजना के तहत देश में छः नए मेगा पोर्ट विकसित किए जाएंगे।
  • पिछले आधे दशक (2014-19) में प्रमुख बंदरगाहों के यातायात में पांच-गुना अधिक वृद्धि हुई है, जिसमें शुद्ध लाभ में तीन-गुना वृद्धि हुई है। भारत सरकार द्वारा प्रमुख बंदरगाहों के संचालन में सुधार के अवसर की पहचान करने के लिए उन्नति (UNNATI) परियोजना शुरू किया गया है। जहाजरानी मंत्रालय नौवहन से संबंधित नियमों, विनियमों एवं कानूनों के निर्माण और प्रशासन के लिए सर्वोच्च निकाय है।
  • शिपिंग उद्योग के तहत शिपिंग और बंदरगाह के अतिरिक्त जहाज निर्माण एवं उसकी मरम्मत, प्रमुख बंदरगाह, राष्ट्रीय जलमार्ग और अंतर्देशीय जल परिवहन शामिल हैं। भारतीय शिपिंग उद्योग सम्पूर्ण विश्व व्यापार का लगभग 8 प्रतिशत हैं। इस क्षेत्र में विकास की बहुत संभावना है।