शीत-रक्त प्रजातियों की जीवन प्रत्याशा
- हाल ही में क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (Queen's University Belfast) और तेल अवीव विश्वविद्यालय (Tel Aviv University) द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण शीत-रक्त प्रजातियां (Cold Blooded Species) तेजी से विलुप्त हो रही हैं।
अध्ययन के प्रमुख बिंदु
- दुनिया भर से 4,100 भूमि कशेरुक (Vertebrate) प्रजातियों के उपापचय क्रियाओं का विश्लेषण किया गया।
- अध्ययन में सरीसृप (Reptiles) और उभयचर (Amphibians) जैसी शीत-रक्त प्रजातियों की जीवन प्रत्याशा पर ग्लोबल वार्मिंग का बहुत विपरीत प्रभाव पाया गया।
- गर्म जलवायु ने वास्तव में ऐसी प्रजातियों के जीवनकाल को छोटा कर दिया है जिसके कारण ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 सरिस्का बाघ पुनर्वास: विश्व का पहला सफल वैज्ञानिक कार्यक्रम
- 2 दुधवा गैंडा जनगणना 2026
- 3 संयुक्त एफएओ-डब्ल्यूएमओ रिपोर्ट
- 4 बांदीपुर टाइगर रिज़र्व
- 5 हिमालयन पैंगोलिन (Himalayan Pangolin)
- 6 ओमेगा ब्लॉक और यूरोप हीटवेव
- 7 इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole - IOD)
- 8 सिकुड़ता कैस्पियन सागर: कारण और परिणाम
- 9 CITES वनस्पति समिति की 28वीं बैठक (PC28)
- 10 स्वदेशी ग्रीन रेफ्रिजरेंट तकनीक विकसित
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- 1 कावेरी डेल्टा संरक्षित कृषि क्षेत्र घोषित
- 2 भारत के पक्षियों की स्थिति रिपोर्ट 2020
- 3 अन्टार्कटिका में 20 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज
- 4 भूमि संरक्षण एवं प्रजातियों की विलुप्ति पर अध्ययन
- 5 आक्रामक विदेशी पौधा प्रजाति का प्रबंधन
- 6 डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा ग्लोबल फ्यूचर्स रिपोर्ट जारी
- 7 केरल सीएफएल पर प्रतिबंध लगाएगा
- 8 कीटनाशकों का पर्यावरण पर प्रभाव
- 9 राष्ट्रीय तटीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और लचीलापन सम्मेलन-2020

