फसल विविधीकरण : आवश्यकता, लाभ एवं चुनौतियां
हाल ही में जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में धान, गेहूं एवं गन्ना जैसी फसलें उत्पादित की जाती है, वहां पानी की गंभीर कमी देखने को मिली है। ऐसी स्थिति में, इन क्षेत्रों में तिलहन उत्पादन को बढ़ाने तथा खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने हेतु फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को अपनाने की तत्काल आवश्यकता है।
फसल विविधीकरण (Crop Diversification) किसे कहते हैं?
- कृषि कार्यों में कम लाभप्रद फसलों के स्थान पर अधिक लाभप्रद फसलों को अपनाने के साथ फसल प्रजातियों एवं क्रॉपिंग प्रतिरूप (Cropping Pattern) में बदलाव करने, ....
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