गरीबी से उन्मुक्ति के दशकीय प्रयास
गरीबी की संकल्पना तथा भारत में गरीबी उन्मूलन के स्थायी समाधान और सतत् विकास लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किए गये प्रयास।
हाल ही में वैश्विक गरीबी को कम करने के प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए अभिजीत बनर्जी, एस्टेर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बनर्जी तथा डुफ्लो के आलोचक और समर्थक समान रूप से इस बात पर सहमत हैं कि गरीबी कोई निरर्थक हो चुके लोगों का समूह नहीं है; गरीबी वैश्विक समस्या है, भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देश विशेषकर अफ्रीकी, एशियाई, लैटिन अमेरिकी देश इससे जूझ रहे हैं। सतत विकास ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत की डेटा सेंटर संबंधी दुविधा: जल संकट बनाम डिजिटल विस्तार
- 2 कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भारत की उभरती आधारभूत सार्वजनिक उपयोगिता
- 3 परीक्षाओं की विश्वसनीयता का संकट: क्या राधाकृष्णन समिति बनेगी समाधान?
- 4 सरकारी स्कूलों का बंद होना: शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय के सामने बढ़ता संकट
- 5 आतंकवाद पर SCO का कड़ा रुख : भारत की कूटनीतिक विजय
- 6 'क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स' पर बढ़ता विवाद
- 7 चिकित्सा आपात स्थितियों में 'प्रोटीन जैव-सेंसर' की भूमिका
- 8 फास्ट ट्रैक कोर्ट: क्या परीक्षा पेपर लीक जैसे अपराधों पर लगेगी प्रभावी रोक?
- 9 Gen Z आंदोलन: विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और संवैधानिक सीमाएँ
- 10 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत

