पराली प्रदूषण एवं पंजाब भू-जल संरक्षण अधिनियम
- 6 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पराली दहन (stubble burning)को कम करने के लिए केंद्र सरकार को राज्यों के परामर्श से 3 माह के भीतर एक व्यापक राष्ट्रीय योजना तैयार करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि पराली प्रदूषण को ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में व्याप्त वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत माना जाता है।
- शीर्ष न्यायालय ने राज्यों को छोटे और सीमांत किसानों हेतु फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण और मशीन वितरित करने का भी आदेश दिया।
- इसके पूर्व 1 नवंबर, 2019 को ‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ [Environment Pollution (Prevention and Control) Authority][Environment Pollution (Prevention and Control) Authority]ने दिल्ली-एनसीआर ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 विधानसभा चुनाव 2026 : एक विश्लेषण
- 2 असम कैबिनेट द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी
- 3 आयुष अनुदान पोर्टल: आयुष ग्रिड पहल के तहत एक नई शुरुआत
- 4 भारत का पहला राष्ट्रीय AI और डिजिटल जल शिखर सम्मेलन
- 5 स्वस्थ भारत पोर्टल: डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति का एकीकरण
- 6 सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग: नवाचार और स्थिरता
- 7 मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) - तीसरा चरण
- 8 समान नागरिक संहिता (UCC) और जनजातीय संरक्षण
- 9 भारत की कुल प्रजनन दर (TFR): प्रतिस्थापन स्तर से नीचे की गिरावट
- 10 तेलंगाना में महिला संचालित सौर ऊर्जा संयंत्र

