राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन महत्व एवं चुनौतियां
- केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 अगस्त, 2021 को राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) योजना का शुभारम्भ किया। यह योजना केंद्रीय मंत्रलय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की आधारभूत परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण (Asset Monetisation) से सम्बंधित है।
योजना के उद्देश्य
- इस योजना का मूल उद्देश्य संस्थागत और दीर्घकालिक पूंजी का दोहन करके ब्राउनफील्ड सार्वजनिक क्षेत्र की परिसंपत्तियों में निवेश को खोलना (Unlocking Investment), जिसे बाद में सार्वजनिक निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- सामाजिक-आर्थिक निवेश के लिए अत्यावश्यक आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए मुद्रीकरण की व्यवस्था करना, ताकि इस क्षेत्र में सार्वजानिक-निजी ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का हरित रूपांतरण; भारत की स्वच्छ औद्योगिक संक्रमण की रूपरेखा
- 2 क्या अक्षय ऊर्जा भारत के लिए व्यापक रोजगार का नया आधार बन सकती है?
- 3 भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना घरेलू शासन से वैश्विक सार्वजनिक हित तक
- 4 सुदृढ़ भूजल शासन व्यवस्था: भारत की जल सुरक्षा की आधारशिला
- 5 नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की राह
- 6 भारत की किशोर न्याय व्यवस्था: पुनर्वास, उत्तरदायित्व और सुधार की चुनौती
- 7 बायोमैटेरियल्स निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प
- 8 भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, प्रतिभा और आपूर्ति शृंखलाओं हेतु रणनीतिक पुनर्संयोजन
- 9 शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन: संकट और सुधार की आवश्यकता
- 10 रणनीतिक स्वायत्तता एवं UN चार्टर: वेनेजुएला और ग्रीनलैंड संकटों के संदर्भ में वैश्विक व्यवस्था की दिशा

