त्वरित सुनवाई का मौलिक अधिकार एवं न्यायिक विलम्ब
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 जुलाई, 2021 को आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की मृत्यु की न्यायिक जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि "त्वरित सुनवाई एक मौलिक अधिकार है" (speedy trial is a fundamental right)।
- जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की पीठ ने भीमा कोरेगांव मामले के आरोपियों का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की।
- बता दें कि स्टैन स्वामी भीमा कोरेगाँव मामले में न्यायिक हिरासत में थे। उन पर हिंसा भड़काने का मामला चल रहा था। कई आदिवासी संगठनों समेत कांग्रेस और जेएमएम ने उनकी गिरफ्तारी का विरोध किया था।
त्वरित सुनवाई ....
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