सहभागी, समावेशी एवं धारणीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस: महत्व एवं मुद्दे
कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों के लिए आवश्यक होता है तथा यह कर्मचारियों, ग्राहकों, आम नागरिकों (समाज) तथा शेयरधारकों के प्रति संगठन की जबावदेही का निर्धारक भी माना जाता है।
- सहभागी, समावेशी एवं धारणीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस समाज के प्रति नैतिक दायित्वों तथा पेड़-पौधों तथा वन्य जीवों की रक्षा में भी सहायक माना जाता है। इस प्रकार इसके व्यावसायिक, सामाजिक एवं मानवीय आदि पक्ष भी होते हैं।
सहभागी, समावेशी व धारणीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस का महत्व
- संस्था के विभिन्न पक्षों का प्रबंधनः वास्तव में सहभागी, समावेशी एवं धारणीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस किसी संस्था के विभिन्न पक्षों के प्रबंधन का एक तरीका है। ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 नैतिक तर्क (Moral Reasoning)
- 2 नैतिक अंतःप्रज्ञा (Moral Intuition)
- 3 करुणा (Compassion)
- 4 सहिष्णुता (Tolerance)
- 5 सहानुभूति (Empathy)
- 6 नवाचार और रचनात्मकता
- 7 सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण
- 8 वस्तुनिष्ठता और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण
- 9 हितों का संघर्ष (Conflict of Interest)
- 10 निष्पक्षता और गैर-पक्षपात (Impartiality and Non-Partisanship)

