मौलिक अधिकार
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और उनके पुलिस बलों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए के तहत सोशल मीडिया पर मुक्त भाषण पर मुकदमा चलाने से रोकने का आदेश दिया।
वादः पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टिज बनाम यूनियन फॉट इंडिया
फैसले के प्रमुख बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल धारा 66ए के तहत आरोप पर लागू होगा और किसी मामले में अन्य अपराधों पर लागू नहीं होगा।
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ वादः सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च, 2015 को अपने इस फैसले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

