नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक

20 नवंबर, 2024 को, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए भारत के पहले स्वदेशी एंटीबायोटिक का शुभारंभ किया।

  • इस एंटीबायोटिक का नाम नैफिथ्रोमाइसिन (Nafithromycin) है।
  • इसे जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • BIRAC एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करता है।
  • इस एंटीबायोटिक का वाणिज्यीकरण वॉकहार्ट (Wockhardt) द्वारा मिकनाफ (Miqnaf) ब्रांड नाम से किया गया है।
  • यह विशेष रूप से एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) से निपटने के लिए विकसित किया गया है, जो एक प्रमुख ....
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नैफिथ्रोमाइसिन और संबंधित पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. नैफिथ्रोमाइसिन भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित एंटीबायोटिक है, जिसे विशेष रूप से एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस से निपटने और कम्युनिटी-अक्वायर्ड बैक्टीरियल न्यूमोनिया जैसी जीवाणु संक्रमणों के इलाज हेतु डिज़ाइन किया गया है।
  2. इसे केवल एक निजी फार्मास्यूटिकल कंपनी द्वारा विकसित किया गया है, बिना किसी सरकारी जैव-प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग के।
  3. बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC), जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम के रूप में कार्य करती है।
  4. BIRAC–RDI फंड का संचालन अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत होता है और इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित किया जाता है।
  5. नैफिथ्रोमाइसिन को मिकनाफ ब्रांड नाम से व्यावसायिक रूप दिया गया है और यह मुख्यतः वायरल श्वसन संक्रमणों को लक्षित करता है।
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