शांति अधिनियम, 2025

20 दिसंबर, 2025 को भारत के राष्ट्रपति ने “परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) विधेयक, 2025” को स्वीकृति प्रदान की, जिसके बाद यह अधिनियम बन गया।

  • इस अधिनियम ने निम्न कानूनों का स्थान लिया:
    • परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962
    • परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010
  • जहाँ 1962 का अधिनियम परमाणु ऊर्जा के विकास एवं उपयोग से संबंधित था, वहीं 2010 का अधिनियम परमाणु दुर्घटनाओं में दायित्व एवं मुआवजे का ढाँचा प्रदान करता था।

विधिक ढाँचा एवं प्रमुख उद्देश्य

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: निजी कंपनियों, संयुक्त उपक्रमों एवं अधिकृत संस्थाओं को परमाणु क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी गई।
  • अनुमत ....
कुल सवाल: 1
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भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. निजी क्षेत्र की संस्थाएँ, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के साथ, परमाणु ऊर्जा उत्पादन और ईंधन निर्माण में भाग ले सकती हैं।
  2. सभी न्यूक्लियर फ्यूल-साइकिल गतिविधियाँ (जैसे संवर्धन और प्रयुक्त ईंधन प्रबंधन) निजी भागीदारी के लिए खुली हैं।
  3. परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को सांविधिक दर्जा देकर संसद के प्रति जवाबदेह बनाने का प्रस्ताव है।
  4. नया दायित्व ढाँचा आपूर्तिकर्ता दायित्व को समाप्त करता है, जो न्यूक्लियर डैमेज अधिनियम, 2010 से भिन्न है।

सही विकल्प चुनिए:

A
केवल 1 और 3
B
1, 2, 3 और 4
C
केवल 2 और 4
D
केवल 1, 3 और 4
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