गिरफ्तारी के आधारों का प्रकटीकरण
नवंबर 2025 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने की, ने निर्णय दिया कि गिरफ्तार व्यक्ति (Accused) को गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) लिखित रूप में उसी समय उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
- यह निर्णय प्रक्रियात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ करता है तथा गिरफ्तार व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 22(1) यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को बिना गिरफ्तारी के कारण बताए हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 50 के अनुसार:
- गिरफ्तारी के पूर्ण आधार की तत्काल सूचना ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

