कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म

यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (Carbon Border Adjustment Mechanism—CBAM) अपनी संक्रमण अवस्था पूर्ण करने के बाद 1 जनवरी, 2026 से पूर्ण संचालन की ओर बढ़ गया है।

  • इससे कार्बन-आधारित अनुपालन निर्यातक देशों, विशेषकर भारत के लिए एक प्रमुख व्यापारिक मुद्दा बन गया है।

दायरा

  • CBAM के प्रारंभिक दायरे में शामिल क्षेत्र:
    • लौह एवं इस्पात।
    • एल्युमिनियम।
    • सीमेंट।
    • उर्वरक।
    • बिजली।
    • हाइड्रोजन।

CBAM क्या है?

  • CBAM, EU का एक तंत्र है, जिसके अंतर्गत कुछ आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाया जाता है, ताकि कार्बन लीकेज को रोका जा सके।
  • कार्बन लीकेज का अर्थ है: कठोर पर्यावरणीय नियमों वाले देशों से उत्पादन का स्थानांतरण उन देशों में होना, ....

कुल सवाल: 1
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यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. CBAM कुछ आयातित वस्तुओं, जैसे लोहा, इस्पात, एल्यूमिनियम, सीमेंट, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन पर कार्बन मूल्य लागू करता है ताकि कार्बन लीकेज को रोका जा सके और EU ग्रीन डील के जलवायु-तटस्थता लक्ष्यों को समर्थन मिल सके।
  2. CBAM का संक्रमण चरण 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुआ और 1 जनवरी, 2026 से इसका पूर्ण परिचालन ढाँचा शुरू हुआ, जिससे भारत के लोहा, इस्पात और एल्यूमिनियम निर्यात सीधे अनुपालन के अधीन हो गए।
  3. CBAM को WTO के गैर-भेदभाव सिद्धांतों से स्पष्ट रूप से छूट दी गई है, जिससे यह अन्य व्यापार-संबंधी जलवायु उपायों से कानूनी रूप से अलग हो जाता है।
  4. WTO का संस्थापक सदस्य होने के नाते भारत, CBAM के व्यापारिक प्रभावों पर आपत्ति WTO की समितियों और विवाद निपटान प्रक्रियाओं के माध्यम से उठा सकता है।
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