नदी प्रदूषण एवं सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
वर्ष 2026 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने लगभग 5 वर्षों की निष्क्रियता के बाद 2021 के स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले, जो प्रदूषित नदियों से संबंधित था को बंद कर दिया और निगरानी की जिम्मेदारी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंप दी।
- न्यायालय ने पुनः यह स्पष्ट किया कि स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्यकर परिस्थितियाँ, संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का अभिन्न हिस्सा हैं।
नदी प्रदूषण की स्थिति
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, 2025 के अनुसार प्रदूषित नदी खंड (Polluted River Stretch - PRS):
- जहाँ जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) 3 mg/L से अधिक हो।
- BOD यह दर्शाता है कि कार्बनिक पदार्थ ....
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