पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025

24 जुलाई, 2025 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए।

  • ये नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी किए गए हैं।
  • इन नियमों के माध्यम से भारत में रासायनिक रूप से दूषित स्थलों की पहचान, मूल्यांकन तथा पुनर्स्थापन/शुद्धीकरण के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा स्थापित किया गया है।

प्रमुख तथ्य

  • दूषित स्थल वे स्थान हैं, जहाँ खतरनाक अपशिष्ट का ऐतिहासिक रूप से निपटान किया गया है, जिससे मृदा, भूजल एवं सतही जल प्रदूषित हो गए हैं।
  • जिला प्रशासन को संदिग्ध दूषित स्थलों पर अर्धवार्षिक रिपोर्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण ....
कुल सवाल: 1
1

पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. ये नियम जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं।
  2. किसी स्थल को दूषित तब घोषित किया जाता है जब खतरनाक रसायन की मात्रा खतरनाक अपशिष्ट नियम, 2016 में निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है।
  3. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को रिपोर्ट प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर प्रारंभिक आकलन करना आवश्यक है।
  4. इन नियमों में “प्रदूषक भुगतान करे” सिद्धांत को सुधार लागत के लिए शामिल किया गया है।

सही विकल्प चुनिए:

A
केवल 2, 3 और 4
B
केवल 1 और 2
C
केवल 1, 3 और 4
D
1, 2, 3 और 4
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

प्रारंभिक विशेष