न्यायिक पर्यवेक्षण एवं अध्यक्ष की शक्तियाँ
जुलाई 2025 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पाडी कौशिक रेड्डी बनाम तेलंगाना राज्य मामले में यह निर्णय दिया कि दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अयोग्यता के मामलों का निर्णय करते समय स्पीकर को अनुच्छेद 122 एवं 212 के तहत पूर्ण प्रतिरक्षा प्राप्त नहीं है।
- इस निर्णय ने दलबदल मामलों में देरी पर न्यायिक समीक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
विधिक ढाँचा एवं प्रक्रियात्मक विलंब
- संविधान की दसवीं अनुसूची स्पीकर/सभापति को दलबदल के आधार पर सदस्यों की अयोग्यता तय करने का अधिकार देती है।
- किन्तु, स्पीकर द्वारा अत्यधिक विलंब से दलबदल विरोधी कानून का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है
- सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार ....
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