बाल तस्करी पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश

दिसंबर 2025 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में निर्देश दिया कि तस्करी के शिकार बच्चों को न्यायालय में “घायल साक्षी (Injured Witness)” के रूप में माना जाए, ताकि साक्ष्यों का संवेदनशील मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके।

न्यायिक दिशानिर्देश एवं साक्ष्य मूल्यांकन

  • तस्करी के शिकार बच्चे की गवाही को उच्च विश्वसनीयता वाले घायल साक्षी के रूप में स्वीकार किया जाए।
  • पीड़ित के बयान में मामूली असंगतियाँ होने पर उसकी एकमात्र गवाही को अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
  • न्यायाधीशों को:
    • वंचित एवं संकटग्रस्त समुदायों से आने वाले बच्चों की
    • सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए
  • न्यायालय ने यह भी कहा कि:
    • शोषण के दौरान ....

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