खुला बाज़ार परिचालन (OMO) और डॉलर-रुपया स्वैप
दिसंबर 2025 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने अत्यधिक प्रणालीगत तरलता को नियंत्रित करने और रुपये की अस्थिरता को संतुलित करने के लिए रणनीतिक डॉलर-रुपया स्वैप तथा खुला बाज़ार परिचालन (Open Market Operations-OMO) का उपयोग किया।
- खुला बाज़ार परिचालन (OMO) में सरकारी प्रतिभूतियों की प्रत्यक्ष खरीद या बिक्री शामिल होती है, जिससे मुद्रा आपूर्ति को विनियमित किया जाता है।
- ये परिचालन “भारित औसत कॉल दर” (Weighted Average Call Rate-WACR) को लक्षित नीतिगत रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने में RBI की सहायता करते हैं।
- RBI, OMO के माध्यम से दीर्घकालिक ब्याज दरों को प्रभावित करता है तथा घरेलू बॉन्ड बाज़ार में स्थिरता बनाए ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

