खुला बाज़ार परिचालन (OMO) और डॉलर-रुपया स्वैप

दिसंबर 2025 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने अत्यधिक प्रणालीगत तरलता को नियंत्रित करने और रुपये की अस्थिरता को संतुलित करने के लिए रणनीतिक डॉलर-रुपया स्वैप तथा खुला बाज़ार परिचालन (Open Market Operations-OMO) का उपयोग किया।

  • खुला बाज़ार परिचालन (OMO) में सरकारी प्रतिभूतियों की प्रत्यक्ष खरीद या बिक्री शामिल होती है, जिससे मुद्रा आपूर्ति को विनियमित किया जाता है।
  • ये परिचालन “भारित औसत कॉल दर” (Weighted Average Call Rate-WACR) को लक्षित नीतिगत रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने में RBI की सहायता करते हैं।
  • RBI, OMO के माध्यम से दीर्घकालिक ब्याज दरों को प्रभावित करता है तथा घरेलू बॉन्ड बाज़ार में स्थिरता बनाए ....
कुल सवाल: 1
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के तरलता प्रबंधन उपकरणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. खुले बाज़ार परिचालन (OMO) में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने हेतु सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री शामिल होती है।
  2. “खरीद-बिक्री” (sell-buy) डॉलर-रुपया स्वैप में, RBI बैंकिंग प्रणाली में रुपये की तरलता प्रविष्ट करने के लिए डॉलर बेचता है।
  3. रेपो लेन-देन के विपरीत, मुद्रा स्वैप में तरलता हेतु सरकारी प्रतिभूतियों को संपार्श्विक (Collateral) के रूप में प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होती।

ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?

A
केवल एक
B
केवल दो
C
तीनों
D
कोई नहीं
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