राष्ट्रीय सुरक्षा एवं मानवाधिकारों का संतुलन: रोहिंग्या मुद्दा
दिसंबर 2025 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की, के समक्ष एक याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक रोहिंग्या शरणार्थी परिवार को स्थापित विधिक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना हिरासत में लेकर निर्वासित किया गया।
- इस मामले ने भारत के कानूनी ढाँचे एवं अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के संदर्भ में शरणार्थियों के प्रति नीति को पुनः चर्चा में ला दिया।
अंतरराष्ट्रीय दायित्व एवं घरेलू कानूनी ढाँचा
- भारत शरणार्थी अभिसमय, 1951 तथा प्रोटोकॉल, 1967 का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।
- विशिष्ट घरेलू कानून के अभाव में, शरणार्थियों को प्रशासनिक रूप से अवैध प्रवासी के रूप ....
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