छाया कठपुतली के पुनरुद्धार के प्रयास

वर्ष 2025 के दौरान आंध्र प्रदेश की पारंपरिक छाया-पुतली कला ‘थोलू बोम्मलाटा’ चर्चा में रही। यह कला धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है, इसलिए इसका संरक्षण और पुनर्जीवन आवश्यक हैं।

कलात्मक विशेषताएं और शिल्प कौशल

  • थोलू बोम्मलाटा आंध्र प्रदेशराज्य से उत्पन्न एक पारंपरिकछाया कठपुतली (Shadow Puppetry)कला रूप है।
  • ये कठपुतलियाँ बड़ी और पारभासीहोती हैं, जिन्हें स्क्रीन पर जीवंत छाया प्रक्षेपित करने के लिएप्रसंस्कृत चमड़े से बनाया जाता है।
  • प्रदर्शनों में मुख्य रूप से संगीत और लयबद्ध संवादों के माध्यम सेरामायण और महाभारतके महाकाव्य आख्यानों को चित्रित किया जाता है।
  • यह कला रूप स्थानीय ग्रामीण दर्शकों को जोड़ने के लिए शास्त्रीय संगीत, लोक गीतों ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

प्रारंभिक विशेष