भुलाए जाने का अधिकार
जनवरी 2026 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालतों के उन आदेशों पर रोक लगा दी, जिनमें इंडियन कानून (Indian Kanoon) से समाचार रिपोर्टों एवं न्यायिक अभिलेखों को हटाने का निर्देश दिया गया था, जो “भुलाए जाने का अधिकार” (Right to be Forgotten) के आधार पर दिए गए थे।
- इस निर्णय का प्रभाव खुली न्याय व्यवस्था, प्रेस की स्वतंत्रता तथा न्यायिक अभिलेखों की डिजिटल पहुँच पर महत्वपूर्ण है।
विधिक विकास एवं संवैधानिक अंतर्संबंध
- सर्वोच्च न्यायालय ने “भुलाए जाने का अधिकार” को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग माना ....
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