RCEP से बाहर भारत की व्यापार विविधीकरण रणनीति
वर्ष 2025–26 में भारत की व्यापार नीति ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (Regional Comprehensive Economic Partnership—RCEP) में शामिल होने के बजाय द्विपक्षीय और मिनीलेटरल आर्थिक व्यवस्थाओं पर जोर जारी रखा है।
- सरकार ने दोहराया है कि 2019 में RCEP से बाहर रहने का निर्णय सही सिद्ध हुआ है।
- वर्तमान प्रयास विश्वसनीय साझेदारों, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ता और ASEAN सहित अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ लक्षित व्यापार वार्ताओं पर केंद्रित हैं।
- साथ ही, भारत इंडो-पैसिफिक आर्थिक ढांचा (IPEF) के सप्लाई चैन अग्रीमेंट में सक्रिय बना हुआ है।
- यह दर्शाता है कि भारत एक बड़े चीन-प्रभावित व्यापार ब्लॉक के बजाय लोचशील आर्थिक गठबंधनों को प्राथमिकता देता है।
- IPEF एक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

