पश्चिमी घाट का संकटग्रस्त पारिस्थितिक तंत्र : वैश्विक जैव विविधाता हॉटस्पॉट हेतु संरक्षण अनिवार्यताएं - संपादकीय डेस्क
पश्चिमी घाट के वनों, झीलों तथा नदियों का यहां की पारिस्थितिक विविधता को बनाए रखने में एक विशेष स्थान है। अतः इनके द्वारा प्रदान की जाने वाली पारिस्थितिक सेवाओं का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए एवं इन्हें सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाली खनन तथा औद्योगिक गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
हाल ही में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) द्वारा किए गए एक अध्ययन में बताया गया है कि वर्ष 1990 से 2020 के बीच पश्चिमी घाट क्षेत्र (WGR) के मृदा अपरदन में 94% की बढ़ोतरी देखी गई है। मृदा अपरदन की यह प्रवृत्ति जैव ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 'क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स' पर बढ़ता विवाद
- 2 चिकित्सा आपात स्थितियों में 'प्रोटीन जैव-सेंसर' की भूमिका
- 3 फास्ट ट्रैक कोर्ट: क्या परीक्षा पेपर लीक जैसे अपराधों पर लगेगी प्रभावी रोक?
- 4 Gen Z आंदोलन: विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और संवैधानिक सीमाएँ
- 5 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 6 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 7 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 8 भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
- 9 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 10 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती

