रूस–चीन रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीजिंग यात्रा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के तुरंत बाद हुई, जो वैश्विक कूटनीति में चीन की बढ़ती केंद्रीय भूमिका को दर्शाती है। इस यात्रा में रूस-चीन रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा पश्चिमी दबाव के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
मुख्य बिंदु
- रूस और चीन ने ऊर्जा, तकनीक और निवेश सहित 40 से अधिक समझौतों पर सहमति जताई।
- दोनों देशों ने “बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था” का समर्थन किया।
- अमेरिका के “एकतरफा वर्चस्व” की नीतियों की आलोचना की गई।
- रूस की चीन पर आर्थिक निर्भरता लगभग 32% तक बढ़ी।
- Power ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बीमा क्षेत्र में 100% FDI को मंजूरी
- 2 ग्रेट निकोबार परियोजना: राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम पारिस्थितिकी और आदिवासी अधिकार
- 3 नकली वकील : कानूनी पेशे में संकट
- 4 मई 2026 के घटनाक्रम पर आधारित
- 5 पुरस्कार एवं सम्मान
- 6 नियुक्ति और त्यागपत्र
- 7 रक्षा (Defense)
- 8 खेल समाचार
- 9 अर्थव्यवस्था
- 10 पर्यावरण एवं पारिस्थिकी
- 1 अमेरिकी ग्रीन कार्ड नीति परिवर्तन: भारत–अमेरिका संबंधों पर प्रभाव
- 2 भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी
- 3 भारत-इटली स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
- 4 भारत-नॉर्वे संबंध : ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
- 5 भारत–नीदरलैंड सांस्कृतिक पुनर्स्थापन
- 6 सिंधु जल संधि विवाद: सुरक्षा, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय जल कानून की नई चुनौतियाँ
- 7 ओपेक से बाहर हुआ यूएई: ऊर्जा भू-राजनीति के बदलते समीकरण
- 8 अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र के नियम और समुद्री कानून

