प्रथमदृष्टया अपराध सिद्ध न होने तक अग्रिम जमानत पर रोक नहीं
23 अगस्त, 2024 को सर्वोच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989' की 'धारा 18' के तहत अग्रिम जमानत पर रोक तब तक लागू नहीं होती जब तक कि आरोपी के खिलाफ अधिनियम के तहत प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता।
- वाद का शीर्षक: शाजन सकारिया बनाम केरल राज्य एवं अन्य (Shajan Skaria Versus The State of Kerala & Anr.)।
- न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि यदि शिकायत को प्रथमदृष्टया पढ़ने पर अपराध के लिए आवश्यक तत्व नहीं पाए जाते हैं, तो धारा 18 का प्रतिबंध लागू ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बीमा क्षेत्र में 100% FDI को मंजूरी
- 2 ग्रेट निकोबार परियोजना: राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम पारिस्थितिकी और आदिवासी अधिकार
- 3 नकली वकील : कानूनी पेशे में संकट
- 4 मई 2026 के घटनाक्रम पर आधारित
- 5 पुरस्कार एवं सम्मान
- 6 नियुक्ति और त्यागपत्र
- 7 रक्षा (Defense)
- 8 खेल समाचार
- 9 अर्थव्यवस्था
- 10 पर्यावरण एवं पारिस्थिकी
- 1 23वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी
- 2 गृह मंत्री के ख़िलाफ़ राज्य सभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव
- 3 लद्दाख में नए जिलों की घोषणा
- 4 कानूनों की समीक्षा करना विधि के शासन का अभिन्न अंग
- 5 भ्रामक विज्ञापन से जुड़े नियम को हटाने वाली अधिसूचना पर रोक
- 6 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का 'पूर्वव्यापी लाभ' बरकरार
- 7 'जमानत नियम है जबकि जेल अपवाद है': सुप्रीम कोर्ट
- 8 NCAHP अधिनियम, 2021 को लागू करने के निर्देश
- 9 परिसीमन आयोग के आदेश न्यायिक समीक्षा से मुक्त नहीं
- 10 मार्च 2026 से पूर्व वामपंथी उग्रवाद को पूर्णतः खत्म करने का लक्ष्य

