केरल की बाढ़: पारिस्थितिकीय क्षरण और अस्थिर भू-उपयोग की सीख
- केरल में 2026 कीबाढ़ सिर्फ अत्यधिक बारिश नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन औरदशकों की खामियों से भरे विकास कानतीजा है।
- 2018 कीविनाशकारी बाढ़ के बावजूद, राज्य नेपारिस्थितिकीय क्षरण को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिससे हरसाल बाढ़ औरविकराल होती जारही है।
- 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 केबीच केरल में सामान्य सेतीन गुना अधिक (13.9 सेमी) बारिश हुई, जिसमें कईस्थानों पर क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति बनी।
- इडुक्की, पत्तनमतिट्टा औरकोट्टायम कीऊंची पहाड़ियों परएक ही दिन में कईभूस्खलन हुए, जिससे व्यापक तबाही हुई।
- पेरियार, भारतपुझा, चालियार, चालकुडी, पम्बा, मणिमाला, मीनाचिल और अचनकोविल जैसी नदियाँ एक साथ उफान परआ गईं, जिससे मध्य औरउत्तरी ....
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