भारत की पाक विविधता और सांस्कृतिक विरासत

  • पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा भारत में मिर्च, आलू, टमाटर और काजू जैसी फसलें लाई गईं, जबकि बिरयानी, कबाब और कोरमा जैसे व्यंजन फारसी एवं मध्य एशियाई प्रभावों की देन हैं।
  • ओडिशा के जनजातीय समुदायों द्वारा बनाई जाने वाली प्रोटीन से भरपूर 'लाल चींटी की चटनी' तथा मध्य भारत में 'महुआ के फूलों' का उपयोग स्वदेशी पारिस्थितिक ज्ञान को दर्शाता है।
  • जलवायु अनुकूल मोटे अनाजों (श्रीअन्न) से निर्मित कर्नाटक का 'रागी मुड्ढे', राजस्थान की 'बाजरा खिचड़ी' और उत्तराखंड की 'मंडुआ रोटी' पारम्परिक टिकाऊ कृषि प्रणाली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  • किण्वन (Fermentation) तकनीक पर आधारित उत्तर भारत की 'कांजी', सिक्किम का 'गुन्द्रुक' और पूर्वोत्तर के बांस/सोयाबीन ....
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