जलवायु संकट के दौर में प्रकृति-सम्मत शहर

  • भारतीय शहरों में चरम जलवायु घटनाएँ जैसे- भारी मानसूनी वर्षा, भीषण गर्मी, वायु प्रदूषण और भूजल संकट, अनियोजित शहरी विस्तार तथा पारिस्थितिक तंत्र (वृक्ष, झीलें और आर्द्रभूमि) के नष्ट होने का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।
  • 'पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि' (अपशिष्ट जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण) और मुंबई का 'संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान' (तापमान नियंत्रण, मैंग्रोव संरक्षण) शहरी आधारभूत संरचना में प्रकृति की संरक्षक भूमिका के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • सतत शहरी विकास के लिए यह अनिवार्य है कि नगर निगमों के बजट, रियल एस्टेट विनियामकों (RERA) तथा निजी परियोजनाओं में 'प्रकृति-आधारित समाधानों' को अनिवार्य आधारभूत संरचना के रूप में शामिल किया ....
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