प्रश्न : बंधुता (किनशिप) में वंश और मैत्री सम्बन्धी नियम किस प्रकार एक दूसरे से भिन्न है? उदाहरण देकर बताएं।
(2015)
उत्तर : नातेदारी में वंश (मातृवंश या पितृ वंश या दोनों वंश) हर समाज में अलग-अलग हो सकते हैं। नातेदारी किसी भी व्यक्ति के पूर्वज या वंशज से होता है। वंशक्रम के नातेदार वे हैं जो वंशक्रम की सीधी वंश परम्परा में आते हैं। ऐसे परस्पर सहयोग करने वाले वर्ग को सदैव मां, बाप तथा बच्चों के आधार पर मान्यता दी जाती है। जैसे- उत्तर भारत में अधिकांशतः पितृवंश परम्परा का प्रचलन है जिसमें पिता द्वारा पुत्र ....
प्रश्न : पश्चिमी यूरोप में औद्योगिक समाज के आविर्भाव ने किस प्रकार पारिवारिक जीवन को परिवर्तित कर दिया?
(2014)
उत्तर : परिवार एक ऐसा सार्वभौमिक समूह या संस्था है, जिसमें दत्तक व्यक्तियों सहित कुछ वैवाहिक एवं रक्त संबंधी सम्मिलित होते हैं तथा जिसे एक इकाई के रूप में सामाजिक मान्यता प्राप्त होती है। हाल के वर्षों में औद्योगीकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास, आधुनिक शिक्षा एवं मूल्य व्यवस्था, आधुनिक कानून, संचार क्रांति आदि ने परिवार को वृहद स्तर पर प्रभावित कर इसमें परिवर्तन को उत्प्रेरित किया है।
आज आधुनिक परिवार उत्पादन की इकाई के बजाय उपभोग की ....
प्रश्न : परिवार की संस्था के प्रकार्यात्मक (फंक्शनलिस्ट) विचारों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। वर्तमान समय में किस प्रकार ये परिवार को समझने में सहायक हैं?
(2014)
उत्तर : परिवार समाज की मौलिक एवं सार्वभौमिक संस्था है। परिवार अनेक महत्वपूर्ण कार्य करता है। इस संबंध में इलियट एवं मैरिल ने लिखा है कि ‘‘किसी भी संस्था के विविध कार्य होते हैं, संभवतः समस्त संस्थाओं में परिवार अत्यंत विविध कार्यों वाली संस्था है।’’ परिवार के प्रमुख कार्यों को दो भागों में बांटा जा सकता है, प्रथम श्रेणी में सार्वभौमिक प्रकार्य आते हैं, जो सभी संस्कृतियों में समान होते हैं तथा द्वितीय, परम्परागत प्रकार्य, जो विभिन्न ....
प्रश्न : आप ‘लिव-इन सम्बंध’ के संस्थायन
(2014)
उत्तर : लिव-इन-रिलेशन का मतलब विवाह पूर्व विवाह रूपी संस्था के उतरदायित्व को पूरा करना। अर्थात् दो विपरीत लिंग वाले व्यक्ति का विवाह पूर्व यौन संबंध स्थापित करना तथा सारी मान्यताओं को निभाते हुए एक छत के नीचे रहना। वर्तमान समाज में औद्योगिकरण, विज्ञान एवं संचार क्रांति, आधुनिक शिक्षा एवं मूल्य व्यवस्था तथा कानून के प्रभाव ने विवाह रूपी संस्था के संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक दोनों पक्षों में परिवर्तन संभव हुआ है, जिसमें को-लिविग एक परिवर्तन के रूप ....
प्रश्न : आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन के फलस्वरूप विवाह एवं परिवार में उदीयमान प्रवृत्तियों की परीक्षा कीजिए।
(2013)
उत्तर : विवाह समाजशास्त्र में परिवार और नातेदारी के समान बच्चे के जन्म और पालन-पोषण से जुड़ी संस्था है। विवाह के सम्बन्ध में कुछ समाजशास्त्रियों ने ये कहा कि यौन सम्बन्धों को स्थापित करने के नियम हैं। अन्य विद्वानों के अनुसार विवाह वैध संतानों को जन्म देने की संस्था है। परन्तु हाल के वर्षों में समाजशास्त्र में यह स्वीकार किया गया है कि विवाह के द्वारा स्त्री-पुरुष भूमिकायें बदल जाती है। इसीलिए विवाह की संस्था भूमिकाओं को ....
प्रश्न : परिवार में समसामयिक प्रवृत्तियों का सोदाहरण विश्लेषण कीजिए।
(2013)
उत्तर : आगवर्न व निमकॉफ के अनुसार ‘‘परिवार तथा वंश पति-पत्नी के मध्य एक स्थाई संबंध है, जो संतान सहित भी हो सकता है, संतान रहित भी।’’ इन परिभाषाओं के विश्लेषण से पता लगता है कि परिवार एक समाजशास्त्रीय अवधारणाओं के रूप में परिवार की विभिन्नता को प्रकट करता है। किसी एक परिभाषा के माध्यम से इसको नहीं समझा जा सकता है। इस संबंध में वर्गेस लॉक की परिभाषा उल्लेखनीय है, ‘‘परिवार उन व्यक्तियों का समूह है ....
प्रश्न : क्या पितृवंश (पितृतंत्र) एक सर्वव्यापी परिघटना है? समीक्षात्मक परीक्षण कीजिए कि पितृवंश समाजों में श्रम के लिंगाधारित विभाजन को किस प्रकार प्रभावित करता है?
(2013)
उत्तर : पितृवंशीय परिवारों में वंशानुक्रम पिता के नाम पर चलता है। परिवार के प्रत्येक मामले में पिता का स्थान प्रमुख रहता है। परिवार की सम्पत्ति पर पिता का अधिकार होता है तथा पिता से उत्तराधिकार का हस्तांतरण पुत्रें को होता है। पितृवंशीय संयुक्त परिवार में हमें एक पुरुष उसके भाई, उसकी बहनें तथा परिवार के सभी पुरुष के बच्चे निवास करते हुए मिलेंगें। नायर, गारो, खासी आदि लोगों में मातृवंशीय परिवार पाया जाता है। मातृसत्तात्मक परिवारों ....
प्रश्न : उदाहरण प्रस्तुत करते हुए वर्तमान समाज में लैंगिक पूर्वाग्रह का विश्लेषण कीजिए।
(2013)
उत्तर : पितृसत्तात्मक समाजों में महिला को पुरुष के समकक्ष न मानकर अधिकारों से वंचित करना, प्रताडि़त करना, दहेज आदि के नाम पर जला डालना आदि बातें लैंगिक न्याय के अभाव अथवा लैंगिक अन्याय का परिचायक है।
भारत में नवीन संविधान के अनुच्छेद 14,15 तथा विभिन्न सामाजिक विधानों के अनुसार भारत में नारियों को स्वतंत्रता, समानता तथा न्याय के अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
वर्तमान समाज में भी ‘‘लैंगिक पूर्वाग्रह’’ तथा नारी पुरुष में भेदभाव देखने को ....
प्रश्न : परिवार और कुटुम्ब में भिन्नता दर्शाइये।
(2012)
उत्तर : परिवार एक ऐसा प्राथमिक समूह है, जो दुनिया के हर समाज में प्रायः पाया जाता है। परिवार के सदस्य आपस में रक्त या विवाह संबंधों तथा एक भावनात्मक संबंध द्वारा एक-दुसरे से जुडे़ रहते हैं। मेकाइवर के अनुसार ‘‘परिवार बच्चों की उत्पत्ति एवं पालन-पोषण की व्यवस्थ करने हेतु पर्याप्त रूप से निश्चित और स्थायी यौन संबंधों से निर्धारित एक समूह है।य् परिवार अपने सदस्यों को एक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। कुटुम्ब या गृहस्थी का ....
प्रश्न : नातेदारी एवं परिवार व्यवस्था में कुल एवं वंशानुक्रम के महत्व का वर्णन कीजिए।
(2012)
उत्तर : भारतीय समाज की सामाजिक संरचना एवं व्यवस्था का निर्माण नातेदारी द्वारा होता है। सामाजिक रुप से मान्यता प्राप्त ऐसे संबंधों को नातेदारी कहा जाता है, जो विवाह, रक्त अथवा गोद लेने पर आधारित होती है। नातेदारी व्यवस्था मानव समाज का एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो माता-पिता तथा संतानों, सहोदरों, वैवाहिक दम्पत्तियों के बीच संबंध को स्थापित करता है। दूसरी ओर वंश एक ऐसा रक्तमूलक तथा एकपक्षीय समूह है, जिसके सदस्य किसी ज्ञात पूर्वज से अपने ....
प्रश्न : विवाह एवं परिवार से आपका क्या अभिप्राय है? आधुनिक समाज में परिवार के संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
(2011)
उत्तर : विवाह दो या दो से अधिक विषमलिंगियों के बीच समाजोनुमोदित, औपचारिक तथा अपेक्षाकृत स्थाई लैंगिक संबंधों की एक व्यवस्था एवं नियमाचारों का एक पुंज है, जो पारिवारिक जीवन के लिए आवश्यक पारस्परिक दायित्वों एवं अधिकारों द्वारा उन्हें एक सूत्र में बांधता है। अर्थात् विवाह यौन संबंधों को नियमित करने वाली एक संस्था है, जिसने परिवार नामक समिति को जन्म दिया है। यह एक जैविक क्रिया के साथ-साथ सामाजिक धार्मिक संस्कार भी है। यद्यपि विवाह एक ....
प्रश्न : कुल एवं वंशानुक्रम
(2011)
उत्तर : एक ऐसे रक्त मूलक एक पक्षीय वंश समूह को कुल कहते हैं, जिसके सदस्य किसी ज्ञात पूर्वज या पूर्वजा से रक्त के आधार पर जुड़े होते हैं। यह पूर्वज या पूर्वजा मिथकीय अथवा पौराणिक व्यक्ति न होकर पांच या छः पीढ़ी पहले रहा कोई वास्तविक व्यक्ति होता है। इन पूर्वजों से जुड़ी कडि़यां सदस्यों को ज्ञात होती हैं। कुल के कई रूप होते हैं:
प्रश्न : बंधुता एवं सामाजिक पूंजी
(2010)
उत्तर : औपचारिक वित्तीय एवं बीमा अवसरों के अभाव के कारण विकासशील देशों की अधिकतर जनसंख्या सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य जीवन संबंधी जोखिम का सामना करने के लिए अनौपचारिक समुदायिक संरचना पर आश्रित है एवं इस संदर्भ में बंधुता की भूमिका अति महत्वपूर्ण हैं खून का रिश्ता, शादी द्वारा स्थापित रिश्ता, दत्तक ग्रहण की परंपरा आदि बंधुता समूह के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
बंधुता एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो उप-सहारा अफ्रीका एवं एशिया के ....
प्रश्न : पश्चिम एवं पूर्व से उदाहरण प्रस्तुत करते हुये, विवाह और परिवार के उभरते हुये रूपों पर चर्चा कीजिए। क्या विवाह के बिना परिवार हो सकता है? परीक्षण कीजिए।
(2009)
उत्तर : औद्योगीकरण, विज्ञान एवं संचार क्रांति, आधुनिक शिक्षा एवं मूल्य व्यवस्था तथा कानून के प्रभाव ने विवाह एवं परिवार रूपी संस्थाओं के संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक दोनों पक्षों में परिवर्तन को संभव बनाया है। विवाह में आने वाले मुख्य परिवर्तन निम्नलिखित हैं:
1. विवाह का यौन संबंधों को तथा मातृत्व एवं पितृत्व को वैधता प्रदान करने वाली संस्था के रूप में महत्व में कमी (विवाह पूर्व यौन संबंधों की मान्यता, सहनिवास, बिना विवाह प्रजनन को मान्यता एवं बिना ....
प्रश्न : एकाकी परिवार एवं औद्योगिक समाज।
(2006)
उत्तर : एकाकी परिवार अथवा मूल परिवार की अवधारणा की ओर सबस पहले हमारा ध्यान मरडॉक ने 1949 में आकर्षित किया था। आकार और संगठन की दृष्टि से मूल परिवार सबसे अहम् होता है। इसका संगठन पति-पत्नी एवं उन पर आश्रित बच्चों के योग से निर्मित होता है। इन परिवारों के अंदर गहरी अंतः क्रिया होती है। इसलिए विचारों, भावों तथा क्रियाओं का आदान-प्रदान उन्हीं के बीच सीमित रहता है।
ऐसे परिवारों में बच्चे वयस्क होते ही ....
प्रश्न : सामाजिक नियंत्रण में परिवार की भूमिका।
(2005)
उत्तर : सामाजिक नियंत्रण में परिवार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। जन्म लेते ही बालक किसी-न-किसी परिवार का सदस्य हो जाता है, जहां समाजीकरण की प्रक्रिया सबसे पहले प्रारम्भ होती है। इसीलिए सामजिक नियंत्रण की प्रक्रिया की भी शुरूआत पहले यहीं होती है। माता-पिता अपने बच्चों को यही सिखलाते हैं कि कौन-सा व्यवहार उचित है और कौन-सा अनुचित है। धार्मिक विश्वासों, परम्पराओं, प्रथाओं, जीवन के मूल्यों एवं प्रतिमानों की जानकारी सर्वप्रथम परिवार में ही होती है ....
प्रश्न : नव वैश्विक अर्थव्यवस्था के भारत में कार्य संगठन और परिवार संरचना पर प्रभाव का विस्तार से परीक्षण कीजिए।
(2004)
उत्तर : वर्तमान विश्व के देश वैश्वीकरण की दिशा में बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आज आवागमन और संदेशवाहन के साधन इतने अधिक विकसित और तीव्रगामी हो गये हैं कि विभिन्न देश एक-दूसरे के काफी निकट आ गये हैं। आज विश्व के सभी देशों में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक पक्षों को एक ही व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
वास्तव में नव वैश्विक अर्थव्यवस्था विश्व व्यापार संगठन के लचीले एवं उदारवादी नीति का ....
प्रश्न : परिवार की परिवर्तनशीलता संरचना में स्त्री-पुरुष की भूमिकाएं।
(2004)
उत्तर : आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लिंग आधारित भूमिकाएं परिवार के परिवर्तन के लिए सबसे उत्तरदायी कारकों में से है। आधुनिकता एवं आधुनिक शिक्षा के प्रसार के फलस्वरूप समाज के हर वर्ग के लोगों के बीच एक नये आधुनिक विचार का उद्भव हुआ है जिससे लिंग आधारित विभेदता अछूता नहीं रहा है। आधुनिक विचार के उद्भव एवं जागृति के कारण वर्षों से दबी हुई नारी वर्ग के बीच एक चेतना सी जागृत हुई है।
स्त्री वर्ग के ....
प्रश्न : परिवार और वंश की संकल्पनाओं का विवेचन कीजिए। संपत्ति के वंशानुक्रय और वंशागति के नियमों के बीच संबंध पर चर्चा कीजिए।
(2003)
उत्तर : विभिन्न समाजों में परिवार के स्वरूप एवं कार्यों की भिन्नता के कारण इसे कई रूप में परिभाषित किया गया है। इसकी रचना या तो जैवकीय आधार पर बने मां-बालक युग्म द्वारा या सामाजिक आधार पर निर्मित माता-पिता संतान के त्रयी बंधनों द्वारा होती है। एक जैवकीय इकाई के रूप में एक परिवार एक समूह है जिसमें स्त्री व पुरुष को यौन संबंधों की स्थापना व संतान पैदा करने के लिए समाज की स्वीकृति प्राप्त होती ....
प्रश्न : निकटाभिगमन निषेध।
(2001)
उत्तर : सभी समाजों में ऐसे कुछ नियम हैं जो व्यक्तियों की विशिष्ट श्रेणियों के बीच विवाह औरलैंगिक संबंधों की स्वीकृति नहीं देते। सामान्यतः व्यक्तियों की ये श्रेणियां रक्त संबंधों की निकटता पर आधारित है, जैसे पिता-पुत्री, माता-पुत्र, अथवा सहोदर भाई-बहन आदि। इस प्रकार के निकटतम संबंधियों के बीच वर्णित किये गये लैंगिक संबंधों को ही निकटाभिगमन निषेध कहा जाता है। निकटाभिगमन निषेध का दायरा हमेशा रक्त संबंधों द्वारा ही निर्धारित हो, ऐसी बात नहीं है। ऐसे ....
प्रश्न : आधुनिक समाजों में परिवार की परिवर्तनशील संरचना के लिए जिम्मेदार कारकों पर चर्चा कीजिए।
(2000)
उत्तर : आधुनिक समाज में अनेक ऐसी नवीन प्रवृत्तियां उत्पन्न हुई हैं जिनके आधार पर परिवार के संरचनात्मक तथा प्रकार्यात्मक परिवर्तनों को देखा जा सकता है। कपाडि़या का विचार है कि नवीन न्याय व्यवस्था, शिक्षा का प्रसार तथा परिवर्तित मनोवृत्तियां परिवार के संरचनात्मक परिवर्तन के लिए उत्तरदायित्व है। दूसरी ओर बोटोमाेर ने अपने अध्ययन के आधार पर यह बताया कि ‘ग्रामीण संयुक्त परिवार में होने वाले परिवर्तनों का प्रमुख कारण यह है कि संयुक्त परिवार आर्थिक विकास ....