प्रश्न : क्या समाजशास्त्र एक विज्ञान है? अपने उत्तर के पक्ष में कारण बताइए।
(2015)
उत्तर : समाजशास्त्र को विज्ञान के रूप में स्पष्ट करने हेतु वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रयोग किया जा सकता है। विज्ञान के समान समाजशास्त्र में भी तथ्यों का अध्ययन तुलनात्मक, प्रकार्यात्मक, सांख्यिकीय आदि पद्धतियों द्वारा किया जाता है जिससे इनको प्रमाणिक, व्यवस्थित व क्रमबद्ध रूप से स्पष्ट कर निष्कर्ष को सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। एक ओर जहां विज्ञान की तरह समाजशास्त्र भी केवल वास्तविक घटनाओं का वर्णन करता है अर्थात इसका संबंध केवल ‘क्या ....
प्रश्न : प्रबोधन ने समाजशास्त्र के उद्भव में किस प्रकार का योगदान किया था?
(2015)
उत्तर : यूरोप में पुनर्जागरण काल के बाद फ्रांसीसी क्रान्ति एवं औद्योगिक क्रान्ति हुयी जिसने यूरोप में व्यापक क्रान्ति ला दी। एक पृथक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र का उदय अठारहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में देखा जा सकता है। प्रारम्भिक जीवन की पद्धति के ध्वस्त हो जाने के कारण उन्हें सामाजिक तथा प्राकृतिक दोनों ही प्रकार की दुनिया को समझने हेतु नए तरीकों को विकसित करना पड़ा। प्रबोधन काल में कई वैज्ञानिकों एवं बौद्धिक चिंतकों ने अपने ....
प्रश्न : मानव क्रियाओं का समाजशास्त्रीय उपागम मनोवैज्ञानिक उपागम से किस प्रकार भिन्न है?
(2014)
उत्तर : मनोविज्ञान एक अन्य विज्ञान है, जिसका समाजशास्त्र से घनिष्ठ संबंध है और यह संबंध सामाजिक मनोविज्ञान की उत्पत्ति के बाद तो और भी घनिष्ठ हो गया है। आज यह स्वीकार कर लिया गया है कि मनुष्य की सामाजिक क्रियाओं एवं अन्तःक्रियाओं पर पर्यावरण संबंधी प्रभावों के अतिरिक्त उनका एक मनोवैज्ञानिक आधार होता है और इस आधार के बिना सामाजिक व्यवहारों को ठीक ढ़ंग से समझा नहीं जा सकता है।
मनोविज्ञान मानव स्वभाव या मानसिक प्रक्रियाओं का ....
प्रश्न : “समाजशास्त्र का उदय यूरोप में हुआ तथा प्रारंभ में संयुक्त राज्य अमेरिका की सामाजिक सुधारोन्मुखता के आधार पर उसका विकास हुआ।“ टिप्पणी कीजिए।
(2013)
उत्तर : समाजशास्त्र के उदय से पूर्व समाज का अध्ययन धार्मिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक तथा राजनीतिक, आर्थिक विधियों से किया जाता था। समाजशास्त्र के उदय की पूर्ववर्ती पार्श्व भूमि में ‘‘सामाजिक’’ व बौद्धिक दो पक्ष हैं। सामाजिक पृष्ठभूमि में औद्योगिक क्रांति, फ्रांस की राज्य क्रांति तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्थान महत्वपूर्ण है। इसके साथ-साथ अमेरिकी समाज में हो रही सुधारात्मक कार्यवाही तथा इससे उत्पन्न विभिन्न जटिल समस्याओं के समाधान ने भी इसे एक पृथक विषय के रूप में ....
प्रश्न : समाजशास्त्र तथा नृविज्ञान की परस्पर तुलना करते हुए उनके अंतर को स्पष्ट कीजिए।
(2013)
प्रश्न : निर्वचनात्मक समाजशास्त्र
(2012)
उत्तर : समाजशास्त्र की स्थापना के समय से ही समाजशास्त्रियों, समाजवैज्ञानिकों के मध्य समाजशास्त्र ‘क्या है’ तथा इसे ‘क्या होना चाहिए’ को लेकर मतभेद रहा है। जहां आरंभिक प्रत्यक्षवादी विचारक इसे विशुद्ध विज्ञान की तरह मानते हुए सामाजिक घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करने पर बल देते रहे, वहीं समाजशास्त्रियों का एक वर्ग सामाजिक घटनाओं की प्रकृति को प्राकृतिक विज्ञान की घटनाओं की तुलना में भिन्न स्वरूप के होने के कारण इसे विशुद्ध विज्ञान मानने पर सहमत नहीं ....
प्रश्न : तुलनात्मक पद्धति
(2012)
उत्तर : समाजशास्त्र में मूर्त तथ्यों या घटनाओं के अध्ययन हेतु परिमाणात्मक या मात्रात्मक पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इसी परिमाणात्मक पद्धति का महत्वपूर्ण स्थान है। सामाजिक विज्ञानों में तुलनात्मक पद्धति का प्रयोग विभिन्न समाजों की तुलना करने या एक ही समाज की विभिन्न समूहों, संस्थाओं आदि के मध्य तुलना करने हेतु किया जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न समाजों या समूहों की सामाजिक संरचना, संस्कृति में पायी जाने वाली समानताओं एवं विभिन्नताओं को स्पष्ट करके एक ....
प्रश्न : समाजशास्त्र के आविर्भाव में फ्रांस की क्रांति और औद्योगिक क्रांति ने किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
(2012)
उत्तर : एक पृथक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र का उद्भव 19वीं शताब्दी में हुआ। यूरोप इस समय फ्रांसीसी तथा औद्योगिक क्रांति के कारण एक तीव्र परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा था। किन्तु, फ्रांसीसी क्रांति तथा औद्योगिक क्रांति से पूर्व यूरोप में 14वीं सदी से 19वीं सदी के बीच हुई वाणिज्यिक क्रांति एवं वैज्ञानिक क्रांति का काल, जो कि ‘पुनर्जागरण युग’ कहलाता है, ने भी समाजशास्त्र के उदय हेतु एक पृष्ठभूमि तैयार की। उल्लेखनीय है कि ....
प्रश्न : हमारी क्रियाओं के बारे में समाजशास्त्र क्या दर्शा सकता है? समाजशास्त्र के व्यवहारिक महत्व की व्याख्या कीजिए?
(2011)
उत्तर : एक ऐसी प्रक्रिया, जो किसी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हो तथा किसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर की गई हो, वह क्रिया के रूप में जानी जाती है। पारसन्स के अनुसार ‘कर्त्ता-परिस्थिति-व्यवस्था की एक ऐसी प्रक्रिया को क्रिया कहते हैं जो अकेले कर्त्ता के लिए तथा समूह की स्थिति में इसके निर्मित करने वाले व्यक्तियों के लिए प्रेरणात्मक महत्व रखती है।’ इस दृष्टि से किसी भी क्रिया में चार तत्वों का होना आवश्यक माना गया ....
प्रश्न : समाजशास्त्र की उत्पत्ति यूरोप में आधुनिकता एवं सामाजिक परिवर्तन का परिणाम ही हैः
(2011)
उत्तर : एक पृथक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र का उदय उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ। यूरोप उस समय फ्रांसीसी तथा औद्योगिक क्रांतियों के कारण परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा था। किंतु, फ्रांसीसी क्रांति तथा औद्योगिक क्रांति से पूर्व यूरोप में 14वीं से 19वीं शताब्दी के बीच हुई वाणिज्यिक क्रांति एवं वैज्ञानिक क्रांतियों का काल, जो ‘पुनर्जागरण युग’ कहलाता है, ने भी समाजशास्त्र के उद्भव हेतु एक उर्वर पृष्ठभूमि तैयार की।
वाणिज्यिक क्रांतिः इस क्रांति का संबंध 1450 ....
प्रश्न : ‘‘इतिहास के बिना समाजशास्त्र मूलहीन है और समाजशास्त्र के बिना इतिहास फलहीन’’, इसको सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2010)
उत्तर : समाज की संरचना इतनी वृहद एवं जटिल है कि एक सामान्य विज्ञान जो इसका संपूर्ण अध्ययन करता है, यह कार्य काफी मुश्किल है। इसलिए समाज के समग्र अध्ययन में विशिष्ट विज्ञानों का सहयोग अवश्य होना चाहिए, जो समाज के विभिन्न पहलुओं का विशिष्ट रूप से अध्ययन करते हैं इस संदर्भ में अन्य सामाजिक विज्ञानों जैसे-इतिहास, मनोविज्ञान, मानव विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान आदि की भूमिका समाजशास्त्रीय अध्ययन में महत्वपूर्ण हो सकती है। जी.ई. होवार्ड का मानना ....
प्रश्न : अंतर्वस्तु विश्लेषण
(2010)
उत्तर : अंतर्वस्तु विश्लेषणः अंतर्वस्तु विश्लेषण समाजविज्ञान में एक कार्यप्रणाली है जिसका उपयोग मानव संचार के अध्ययन में किया जाता है। अर्ल बॉबी ने भी परिभाषित करते हुए इसे मानव संचार की अध्ययन विधि बताया है। जैसे - पुस्तक, बेवसाइट, चित्रकला आदि। इस विधि का उपयोग मानवविज्ञानियों द्वारा मुद्रित साक्षात्कार के विश्लेषण में किया जाता है। इस विधि का प्रयोग उन तथ्यों से सारांशित एवं परिमाणात्मक विश्लेषणों के लिए किया जाता है जो वैज्ञानिक विधि पर आधारित ....
प्रश्न : समाजशास्त्र के उदय की यूरोप के आधुनिकीकरण के साथ किस प्रकार से सहलग्नता है?
(2008)
उत्तर : एक पृथक विषय के रूप में समाजशास्त्र का इतिहास 150 वर्ष से अधिक पुराना नहीं है। पूर्व में समाज, सामाजिक सम्बन्धों, परिवार, विवाह, सम्पत्ति, सामाजिक संस्थाओं आदि पर धर्म का स्पष्ट प्रभाव था, तथा निरीक्षण एवं परीक्षण को कोई महत्व नहीं दिया गया था। अठारहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों एवं उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में इतिहास एवं दर्शन की अध्ययन विधियों का मिलाजुला रूप देखने को मिलता है। इससे समाजशास्त्र के विकास में काफी ....
प्रश्न : समाजशास्त्रीय अन्वेषण में मूल्यों की भूमिका
(2008)
उत्तर : समाजशास्त्रीय अन्वेषण में ऐसी पद्धतियों की आवश्यकता है, जो अध्ययन की समस्या के मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों ही पक्षों की जानकारी प्राप्त करने में सहायक हों। मात्रात्मक पद्धतियां, आय, लिंग, आयु, सामाजिक वर्ग इत्यादि जैसे चरों के अध्ययन में सहायता देती है। गुणात्मक पद्धतियां ऐसे चरों के अध्ययन में सहायक सिद्ध होती हैं,
जिनको कोई संज्ञा नहीं दी जा सकती, जैसे अच्छा और बुरा। इसके लिए हम उत्तर देने वाले के मत के अनुसार सूचना को ....
प्रश्न : समाजशास्त्र के उद्गम के बौद्धिक स्रोत्र।
(2006)
उत्तर : जिन परिस्थितियों के चलते समाजशास्त्र का उदय हुआ, वे बौद्धिक और सामाजिक दोनों थीं। समाजशास्त्र के उद्गम के चार बौद्धिक स्रोत हैं:
शुरुआत में इनमें से दो, इतिहास दर्शन और सामाजिक-राजनीतिक सुधार आंदोलन, जिसके लिए सामाजिक सर्वेक्षण आवश्यक हुआ, विशेष रुप से महत्वपूर्ण थे। इतिहास दर्शन 18 वीं शताब्दी में सामने आया। इसके संस्थापकों में अबे-द-से पियरे और जिआमबतिस्ता विको थे। प्रगति के जिस आम विचार को सूत्रबद्ध ....
प्रश्न : समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान के साथ उसके संबंध।
(2005)
उत्तर : समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र परस्पर एक दूसरे से सम्बद्ध हैं। वास्तव में आर्थिक और सामाजिक संबंध आपस में जुड़े हुए हैं और समय-समय पर एक दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं। प्रायः तमाम सामाजिक संबंधों की जड़ों में आर्थिक संबंध होते हैं। परिवार, जाति, वर्ग आदि में आर्थिक हितों के आधार पर सहयोग एवं संघर्ष पाया जाता है।
समाजशास्त्र एवं अर्थशास्त्र के बीच कितना घनिष्ठ संबंध है यह मार्क्स के ‘दास कैपिटल’ एवं वेबर के ‘द प्रोटेस्टेंट ....
प्रश्न : समाजशास्त्र एक निर्वचनात्मक शास्त्र के रूप में।
(2001)
उत्तर : मैक्स वेबर का उद्देश्य समाजशास्त्र को विज्ञान बनाना था। इस उद्देश्य की प्रप्ति के लिए उसने आदर्श प्रारूप के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था। वास्तव में वेबर, कॉम्टे एवं दुर्खीम के प्रत्यक्षवाद की अवधारणा से सहमत नहीं है। वेबर का कहना है कि समाजशास्त्र का अध्ययन पूर्णरूपेण प्राकृतिक विज्ञान की भांति असंभव है क्योंकि सामाजिक घटना का अध्ययन एक व्यक्ति के द्वारा किया जाता है। अतः यह संभावना है कि अध्ययन कर्त्ता का स्वयं विचार ....
प्रश्न : समाजशास्त्र एवं सामाजिक मानवशास्त्र।
(2000)
उत्तर : समाजशास्त्र एवं सामाजिक मानवशास्त्र एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित है जिसके फलस्वरूप दोनों के बीच एक निश्चित विभाजक रेखा खींचना संभव नहीं है। इवान्स प्रिचार्ड की मान्यता है कि सामाजिक मानवशास्त्र की समाजशास्त्रीय अध्ययनों की एक शाखा माना जा सकता है, वह शाखा जो प्रमुखतः अपने को आदिम समाजों के अध्ययन में लगाती है। परंतु समाजशास्त्र शब्द का प्रयोग साधारणतया सभ्य समाजों की विशिष्ट समस्याओं के अध्ययन से लगाया जाता है। सामाजिक मानवशास्त्र में ....
प्रश्न : औद्योगिक क्रांति के उप-उत्पाद के रूप में समाजशास्त्र
(1999)
उत्तर : औद्योगिक क्रांति की शुरुआत इंग्लैंड में 1760 ई. को हुई एवं इस क्रांति ने सामाजिक एवं आर्थिक स्तर पर लोगों को काफी प्रभावित किया। साथ ही बहुत सी वस्तुओं जैसे Spinning Jenny, Water frame, Mule इत्यादि का हुआ जिसने यूरोपियन समाज की यथास्थिति को ही बदल दिया। सामाजिक व्यवस्था पूंजीवादी समाज में परिणत हो चुकी थी। इन परिणामों के फलस्वरूप बहुत से प्रारंभिक समाजशास्त्रियों ने इसे सामाजिक विघटन के रूप से देखा। उदाहरण के तौर ....