भारत में लिव-इन संबंध वैधानिकता एवं संबंधित निर्णय
13 जून, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू परिवारों में संपत्ति के बँटवारे के संबंध में एक अहम फैसला देते हुए कहा कि बिना शादी के लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपति की नाजायज संतान पारिवारिक संपत्ति में हिस्से की हकदार होगी।

- इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति को संपत्ति के अधिकार से इसीलिए वंचित कर दिया गया था क्योंकि वह अविवाहित दंपति का बेटा था।
- जस्टिस एस अब्दुल नजीर और विक्रम नाथ की बेंच ने कहा कि उस लड़के के माता-पिता लंबे समय तक विवाहित ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत में शहरी इमारतों की अग्नि सुभेद्यता: कारण, प्रभाव और समाधान
- 2 भारत में बढ़ता कैंसर का बोझ: चुनौतियाँ, कारण और रणनीतिक समाधान
- 3 आपदा प्रबंधन में ‘स्मार्ट एआई कैशिंग’ और 'कोऑपरेटिव कैशिंग' की भूमिका
- 4 भारत-कनाडा संबंध:अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध की चुनौती
- 5 राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: पहली बार CEO की नियुक्ति क्यों?
- 6 कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र डेटा लीक: भारत की साइबर सुरक्षा के लिए चेतावनी
- 7 किशोर मानसिक स्वास्थ्य बनाम डिजिटल व्यसन
- 8 जी-7 में भारत: बदलती पश्चिमी दुनिया और नई रणनीति
- 9 भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य
- 10 अध्यादेश और न्यायिक स्वतंत्रता

