क्वांटम सुप्रीमेसी तथा क्वांटम कंप्यूटिंग: महत्व एवं चुनौतियां
हाल ही में चीनी वैज्ञानिकों की एक टीम ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर का निर्माण कर इस क्षेत्र में अपनी क्वांटम सुप्रीमेसी (Quantum Supremacy) का दावा किया है। यह क्वांटम कंप्यूटर दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटरों की तुलना में किसी भी कार्य को 100 ट्रिलियन गुना तेजी से करने में सक्षम है।
क्वांटम सुप्रीमेसी क्या है?
- इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग वर्ष 2012 में कैलिफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर जॉन प्रेस्किल द्वारा प्रस्तावित किया था। उनके अनुसार क्वांटम कंप्यूटर किसी भी ऐसी गणना को कर सकता है जिसे आधुनिक सुपर कंप्यूटर करने में सक्षम ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बच्चों के लिए डिजिटल सुरक्षा: अधिकार, जोखिम और नियामकीय अंतराल
- 2 ऊर्जा सुरक्षा: भारत का नया रणनीतिक दृष्टिकोण
- 3 भारत की जैव-अर्थव्यवस्था: नवाचार, अवसर और नीतिगत चुनौतियाँ
- 4 शहरी भारत की पुनर्कल्पना: एकीकृत, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख बुनियादी ढांचे की ओर
- 5 लोचशील आपूर्ति शृंखलाएँ: भारत की आर्थिक सुरक्षा का एक सुदृढ़ स्तंभ
- 6 भारत में सुदृढ़ नवाचार पारितंत्र का निर्माण: क्षमताएँ और संरचनात्मक बाधाएँ
- 7 प्रतीकात्मकता से परिवर्तन की ओर: भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी
- 8 भारत में गिग कर्मियों के अधिकार: मान्यता बनाम वास्तविकता
- 9 भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु: नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ
- 10 संप्रभु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: भारत की रणनीतिक आवश्यकता

