महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु : आलोचनात्मक विश्लेषण
भारतीय संस्कृति में वैवाहिक संबंधों को पारिवारिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विशेषताओं से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि, औपनिवेशिक काल से जब भी इस दिशा में सुधार संबंधी कदम उठाने के प्रयास किए गए हैं, समाज के एक तबके ने इन सुधारों का व्यापक विरोध किया है। भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के साथ 21वीं सदी के समाज में महिलाओं को पुरुषों के समान दर्जा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में विवाह की न्यूनतम आयु को बढ़ाकर उसे कानूनी रूप प्रदान किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
दिसंबर 2021 में भारत ....
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