दोषपूर्ण जीन सुधार प्रक्रिया
अनुवांशिक समस्याओं से निजात पाने में दोषपूर्ण जीन सुधार प्रक्रिया एक आकर्षक अनुसंधान प्रयोग है। परंतु यह समाज में असमानता व अन्य खतरनाक परिणाम भी उत्पन्न कर सकते हैं।
किसी ‘दोषपूर्ण जीन’ को सुधारने या उसे दूसरे जीन से प्रतिस्थापित करने की प्रक्रिया को जीनोम एडिटिंग (Genome editing) कहा जाता है। 28 सितंबर, 2018 को हांगकांग (चीन का स्वायत्त प्रदेश) में शेन्जेन (Shenzhen) स्थित सदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के चीनी वैज्ञानिक ‘हे जियानकुई’ (He Jiankui) ने घोषणा की थी कि उन्होंने विश्व में पहली बार किसी बच्चे के जन्म में जीन एडिटिंग प्रक्रिया का उपयोग किया है। हालांकि, चीन ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 इन्फोडेमिक और जनता का विश्वास
- 2 भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की चुनौती
- 3 COP31: वैश्विक जलवायु कूटनीति की अग्निपरीक्षा
- 4 डिजिटल हवाला: तकनीक के साथ बदलता भूमिगत बैंकिंग तंत्र
- 5 NSE का प्रस्तावित IPO: सेल्फ-लिस्टिंग और नियामकीय चुनौतियाँ
- 6 सोशल मीडिया और किशोरों की सुरक्षा: Meta समझौता और भारत के लिए सबक
- 7 भारत की डेटा सेंटर संबंधी दुविधा: जल संकट बनाम डिजिटल विस्तार
- 8 कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भारत की उभरती आधारभूत सार्वजनिक उपयोगिता
- 9 परीक्षाओं की विश्वसनीयता का संकट: क्या राधाकृष्णन समिति बनेगी समाधान?
- 10 सरकारी स्कूलों का बंद होना: शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय के सामने बढ़ता संकट

