जल-संकट की गंभीर स्थितिकारण एवं समाधान
वीरेंद्र अलावदा
जल, जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने वाला एक प्रमुख प्राकृतिक संसाधन है। किन्तु लंबे समय से जल संरक्षण की उपेक्षा, जल संसाधनों के दुरुपयोग, नदीय प्रदूषण एवं अत्यधिक भूजल दोहन के कारण भारत एक गंभीर जल संकट के कगार पर है। इन सभी के बावजूद जल संकट और उसका प्रबंधन भारत में आम चर्चाओं का विषय नहीं बन सका है।
विश्व वन्यजीव कोष (Worldwide Fund for Nature-WWF) द्वारा हाल ही में जारी वाटर रिस्क फिल्टर (Water Risk Filter) रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 100 शहरों को वर्ष 2050 तक गंभीर जल-संकट की समस्या का सामना ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 2 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 3 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 4 भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
- 5 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 6 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 7 एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली लेज़र बीम
- 8 भारत–यूएई संबंध : ऊर्जा सुरक्षा से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक
- 9 भारत में जैव-ऊर्जा की संभावनाएं हरित ऊर्जा संक्रमण का आधार - आलोक सिंह
- 10 पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह

