भारत के लिए एक व्यापक रक्षा एवं सामरिक नीति की आवश्यकता- (डॉ. अमरजीत भार्गव)
परिवर्तनशील वैश्विक व्यवस्था तथा तकनीक एवं नवाचारों के प्रयोग के कारण वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों द्वारा अपनी रक्षा एवं सामरिक नीति को अद्यतन करने की आवश्यकता महसूस हुई है। चीन ने अपनी आर्थिक प्रगति के साथ-साथ रक्षा एवं सामरिक क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं। रक्षा एवं सामरिक क्षेत्र में मजबूती प्राप्त करके चीन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में निर्णयकारी भूमिका निभा रहा है। प्रमुख एशियाई शक्ति होने तथा वैश्विक कूटनीतिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए यह आवश्यक है कि भारत भी एक व्यापक रक्षा एवं सामरिक नीति के निर्माण की दिशा में कार्य करे, जो इसके आर्थिक एवं ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 2 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 3 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 4 भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
- 5 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 6 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 7 एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली लेज़र बीम
- 8 भारत–यूएई संबंध : ऊर्जा सुरक्षा से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक
- 9 भारत में जैव-ऊर्जा की संभावनाएं हरित ऊर्जा संक्रमण का आधार - आलोक सिंह
- 10 पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह
- 1 परिवर्तनशील भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक स्थिति : वैश्विक व्यवस्था एवं भारत
- 2 कॉरपोरेट गवर्नेंस : पारदर्शिता तथा नैतिकता आधारित व्यावसायिक शासन - (महेन्द्र चिलकोटी)
- 3 भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली : एक राष्ट्रीय निधि -(सतीश कुमार कर्ण)
- 4 सिंथेटिक बायोलॉजी : अनुप्रयोग एवं चुनौतियां- (शक्ति कुमार दुबे)
- 5 जलवायु परिवर्तन : प्रभाव, अनुकूलन एवं भेद्यता

