प्रौद्योगिकी ने जितने रोजगार कम किए हैं, उससे कहीं अधिक बढ़ाए हैं
आर्थिक विकास, मानव पूंजी के संचय तथा आधारभूत अवसंरचनाओं की मूलभूत आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। 1930 में जॉन मेनार्ड कीन्स ने कहा था कि प्रौद्योगिकी का कुशल उपयोग मनुष्य को 100 वर्षों के भीतर आराम तथा विलासिता के युग में ले जाएगा। कीन्स का मानना था कि भविष्य में यदि मनुष्य को संतुष्ट रहना है तो सभी को कुछ काम करना होगा और दिन के तीन घंटे पर्याप्त होंगे। वर्तमान में दुनिया इस तरह की वास्तविकता से बहुत दूर है।
औद्योगिक फर्म, उत्पादन के लिए नई प्रौद्योगिकी अपनाते हैं, जिससे बाजार का विस्तार होता है ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सामाजिक समानता की गारंटी नहीं देता।
- 2 स्वतंत्रता तब तक निरर्थक है जब तक उसमें गलतियाँ करने की स्वतंत्रता शामिल न हो।
- 3 हमारी शिक्षा प्रणाली रटने को पुरस्कृत करती है, जबकि भविष्य को नवाचार की आवश्यकता है।
- 4 चरित्र का निर्माण संकट में नहीं होता, वह केवल उसमें प्रदर्शित होता है।
- 5 डिजिटल युग में निजता: एक मौलिक अधिकार या एक बिकने वाली वस्तु?
- 6 न्यायपूर्ण समाज वह है जहाँ विशेषाधिकार कर्तव्य द्वारा संतुलित होता है
- 7 लोकतंत्र की उत्तरजीविता एक सूचित और निष्पक्ष नागरिक समाज पर निर्भर करती है।
- 8 आत्म-जागरूकता के बिना, ज्ञान केवल एक उपकरण है; इसके साथ, यह ज्ञानोदय है।
- 9 केवल इसलिए कि आपके पास विकल्प है इसका अर्थ यह कदापि नही की उनमे से कोई एक ठीक होगा ही - डॉ. श्याम सुंदर पाठक
- 10 जीवन, स्वयं को अर्थपूर्ण बनाने का अवसर है
निबन्ध
- 1 वैश्विक शरणार्थी संकटः समस्या एवं समाधान
- 2 सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्त्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं
- 3 खतरे में धरती नहीं, हम हैं
- 4 अक्षय ऊर्जा, भविष्य की आवश्यकता है
- 5 मौन सबसे सशक्त भाषण है, धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी
- 6 स्त्री-पुरुष संबंधः परिवर्तनशील नैतिक मानदंड
- 7 ग्रामीण रूपान्तरण की चुनौतियाँ व अवसर
- 8 जागरूक मतदाताः लोकतन्त्र का मजबूत स्तंभ

