डिजिटल युग में निजता: एक मौलिक अधिकार या एक बिकने वाली वस्तु?

मनुष्य की विकास यात्रा मूलतः सुरक्षा और आवरण की खोज रही है। गुफाओं से लेकर गगनचुंबी इमारतों तक, हमने अपने एकांत और रहस्यों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत दीवारें और ताले बनाए। लेकिन आज, 21वीं सदी के डिजिटल युग में एक अजीब विरोधाभास जन्म ले चुका है। हम अपने घरों के भौतिक दरवाजों पर तो भारी ताले लगाते हैं, लेकिन आभासी दुनिया में हमने अपने जीवन के सबसे अंतरंग पन्नों को एक खुली किताब बनाकर रख दिया है।

आज हम जो सोचते हैं, जो खरीदते हैं, जहाँ जाते हैं और जिनसे मिलते हैं—यह सब 'डेटा' के रूप में सर्वरों में ....

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