चरित्र का निर्माण संकट में नहीं होता, वह केवल उसमें प्रदर्शित होता है।
कल्पना कीजिए कि एक विशाल जहाज गहरे महासागर में एक भयंकर तूफान में फँस गया है। लहरें उसे निगलने के लिए उठ रही हैं और तेज हवाएं उसके मस्तूल को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। यह तूफान उस जहाज का 'निर्माण' नहीं कर रहा है; यह केवल इस बात को 'प्रदर्शित' कर रहा है कि जब वह जहाज एक शांत बंदरगाह (Dry dock) में बन रहा था, तब उसके निर्माताओं ने उसमें कितनी मजबूत लकड़ी और कितनी ईमानदारी का इस्तेमाल किया था। ठीक यही नियम मानव जीवन और उसके चरित्र पर लागू होता है।
अक्सर यह भ्रांति होती है कि ....
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