हमारी शिक्षा प्रणाली रटने को पुरस्कृत करती है, जबकि भविष्य को नवाचार की आवश्यकता है।
मानव सभ्यता का विकास किसी बंद कमरे में बैठकर पुरानी किताबों को रटने से नहीं हुआ, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांड के रहस्यों पर सवाल उठाने से हुआ है। आदिमानव द्वारा पहिए का आविष्कार हो या न्यूटन द्वारा गुरुत्वाकर्षण की खोज—ये सभी 'नवाचार' मानव की अदम्य 'जिज्ञासा' की उपज थे। बच्चे जन्म से ही वैज्ञानिक होते हैं, जो हर चीज के बारे में "यह क्या है?" और "क्यों है?" पूछते हैं। लेकिन, विडंबना देखिए कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली उस नैसर्गिक जिज्ञासा को पोषित करने के बजाय, उसे एक पूर्व-निर्धारित सांचे में ढालने का प्रयास करती है।
हम एक ऐसी व्यवस्था का ....
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