खाद्य प्रसंस्करण उद्योग: कृषि के विकास में भूमिका
खाद्य प्रसंस्करण से तात्पर्य, विभिन्न तरीकों और तकनीकों के माध्यम से कच्चे कृषि उत्पादों या सामग्रियों को प्रसंस्कृत या मूल्य वर्धित खाद्य उत्पादों में परिवर्तित करना है।
- इसमें ऑपरेशनों की एक श्रृंखला शामिल है, जो खाद्य सामग्रियों के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों को बदलकर उन्हें उपभोग के लिए अधिक उपयुक्त बनाती है, उनके शेल्फ जीवन को बढ़ाती है, उनके स्वाद को बढ़ाती है, उनके पोषण मूल्य में सुधार करती है और उन्हें भंडारण, वितरण और उपभोग के लिए अधिक सुविधाजनक बनाती है।
- भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है, जिसका उत्पादन 2025-26 तक 535 ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

